Arnico -Nepal,s cultural ambassador In China
कुछ कलाकर इतिहास में अमर हो जाते हैं। ऐसा ही कलाकार था अरनि को। १२ वी शताब्दी में अरनिको नेपाल के पाटन इलाके में पैदा हुआ था। मात्र १७ साल की उम्र में वो ७० कलाकारों के दल को लेकर तिब्बत कुछ बौद्ध मठो में चित्रकारी करने और]निर्माण करने गया। वहां से उसे चंगेज खान के पौत्र चीन के राजा कुबलाई खान ने उसे पेइचिंग [चीन की राजधानी ] बुला लिया। अरनिको चीन में आजीवन रहा और उसने वहां पेइचिंग का मशहूर श्वेत पैगोडा बनाया , कुबलाई खान का प्रसिद्ध चित्र भी अरनिको ने ही बनाया। अरनिको ,आजीवन चीन में ही रहा.अरनिको के बारे में नेपाल के इतिहास में कोई भी जानकारी नहीं मिलती। जो भी उसके विषय में पता चला है वो चीनी अभिलेखों से। अरनिको नेवार जाति का था। अरनिको जिस रस्ते से तिब्बत गया था अब उसे रस्ते को चौड़ा करके अरनिको हाइवे बना दिया गया है। अरनिको नेपाल -चीन मैत्री का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है इसलिए इस काठमांडू से लहासा हाइवे का नाम उसके नाम पर रखा गया।[पिछले साल मैं मोटरसाईकल इस हाईवे द्वारा नेपाल चीन सीमा तक गया था ]पेइचिंग के वर्जित प्रासाद के मंदिर में नेपाली भूषा में अरनिको की प्रतिमा लगी हुयी ...