गंगटोक आते हुए कलिमपोंग जिले में यह दीवार पर बना उत्किर्नन दिखा। गोरखा संस्कृति की अलग पहचान हेतु समिति द्वारा निर्मित है।गोरखा पहचान का रोचक इतिहास है।गोरखा शब्द की उत्पत्ति गौ +रक्षा से हुई। (नेपाल में कुछ साल पहले तक गौ हत्या की सजा फांसी थी )गुरु गोरक्षनाथ या गोरखनाथ को नेपाल में राष्ट्र संत माना जाता है।इन्हीं के अनुयायियों ने नेपाल में गोरखा राज्य की स्थापना की । गोरखपुर शहर का नाम भी गुरु गोरखनाथ के नाम पर है।गोरखा के राजा प्रथ्वी नारायण शाह के नेतृत्व में नेपाल के एकीकरण की शुरुआत हुई।गोरखा राज्य का विस्तार हिमाचल, सिक्किम, उत्तराखंड तक हुआ।सुगौली की सन्धि के बाद दार्जिलिंग, जो नेपाल का हिस्सा था ब्रिटिश इंडिया में मिला लिया गया। अब यह पश्चिम बंगाल का एक हिस्सा है।बंगाल में उपेक्षित महसूस करने पर भारतीय गोरखाओ ने गोरखालैंड का आंदोलन शुरू किया। अभी गोरखा शब्द का प्रयोग मूलत राई,लिम्बु,मगर, तमांग,ठाकुरी ,छेत्री, सुनुवार जाति के लोगों के लिए किया जाता है।परम्परागत गोरखा सैनिक भी इन्हीं जातियों से आते हैं।